क्या अब भी कहेंगे चौकीदार प्योर है, जी ?

2014 के भारतीय आम चुनाव के प्रचार के दौरान, मोदी ने अपने भाषणों में वादा किया था कि वह देश की सेवा प्रधानमंत्री के रूप में नहीं, बल्कि एक चौकीदार के रूप में करेंगे। मोदी ने आगे कहा कि एक चौकीदार के रूप में वह कभी किसी को जनता के पैसे पर कब्ज़ा करने की इजाज़त नहीं देंगे। इसी संदर्भ में 19 सितंबर 2018 को जब कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने राजस्थान की एक रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निशाने पर लिया और उन्हें ‘चोर’ बताया तो चौकीदार आग बबूला हो गया था।

डूंगरपुर के सागवाड़ा में एक सभा को संबोधित करते हुए राहुल ने कहा था कि, “नरेंद्र मोदी ने कहा था कि मैं देश का प्रधानमंत्री नहीं बनना चाहता हूं, मैं देश का चौकीदार बनना चाहता हूं और अब देश के दिल में एक नई आवाज़ उठ रही है, गली-गली में शोर है, हिंदुस्तान का चौकीदार चोर है।”राहुल गांधी ने यह बोलने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर रफ़ायल ख़रीदारी में घोटाला करने और कारोबारी अनिल अंबानी को फ़ायदा पहुंचाने का आरोप भी लगाया।

उनके इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा नेता अरुण जेटली ने राहुल गांधी को “मसखरा राजकुमार” बताया। उन्होंने फ़ेसबुक पर ‘मसखरा राजकुमार के झूठ’ नाम से एक पोस्ट लिखा था, जिसमें उन्होंने राहुल पर लोकतंत्र को कमजोर करने का आरोप लगाया था।

उन्होंने लिखा, “एक परिपक्व लोकतंत्र में जो झूठ के सहारे होते हैं उन्हें लोक जीवन में अयोग्य माना जाता है।” यह मामला इतना तूल पकड़ गया था कि कथित ईमानदार मोदी सरकार ने इसे अपनी निजी अवमानना माना। चूंकि राफेल लड़ाकू जेट सौदे से संबंधित अनुबंधों को देने में कथित अनियमितताओं और पक्षपात के संबंध में मोदी पर निशाना साधा गया था। 14 दिसंबर को, गांधी ने कहा कि चौकीदार चोर है और उनकी पार्टी राफेल सौदे में किए गए भ्रष्टाचार को साबित करेगी।

सरकार ने राफेल सौदे में किसी भी गड़बड़ी से इनकार किया है और भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने भी अपने दिसंबर 2018 के फैसले की समीक्षा की मांग करने वाली सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया और राफेल सौदे को बरकरार रखा, जिसमें कहा गया कि कोई अनियमितता या भ्रष्टाचार नहीं पाया गया है। फिर क्या था भाजपा ने चौकीदार चोर है कि जगह चौकीदार प्योर है का नारा दिया। सरकार ने राहुल गांधी के नारे को दबाने की पुरजोर कोशिश की लेकिन यह 2018 में दफ़न किया नारा आज फिर देश में नए स्वरूप में मुखर हुआ है वोट चोर गद्दी छोड़।

यहां यह बात महत्वपूर्ण हो जाती है कि राहुल गांधी ने जो नारा 1918 में दिया था उसकी पुष्टि आज देश भर में गूंज रही वोट चोर गद्दी छोड़ में साफ़ सुनाई दे रही है। दरअसल पिछले सालों में यह आवाज इसलिए प्रभावी नहीं हो पाई क्योंकि अरबों रुपए खर्च कर राहुल को पप्पू रुप में इतना प्रचारित किया गया कि जनता उस पर विश्वास नहीं कर पाई। लेकिन सन् 2025 का मानसून सत्र जिसमें प्रतिपक्ष नेता राहुल गांधी ने वोट चोरी का जो एटमी हमला सटीक और तथ्यों के साथ बोला। उससे भाजपा और संघ सिहर उठा है। राहुल गांधी अब अकेले नहीं उनके साथ पूरा विपक्ष इंडिया गठबंधन और देश की अवाम खड़ी है।

चुनाव आयोग झूठ पर झूठ बोल रहा है। बिहार चुनाव में वोट चोरी की तैयारी एसआईआर के ज़रिए जो की जा रही थी। 65 लाख मतदाताओं को सूची से बाहर कर दिया था। उस पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक तो नहीं लगाई पर इस वोट चोरी के बढ़ते आंदोलन और तथ्यों को स्वीकार करते हुए। 65 लाख मतदाताओं को आधार कार्ड की मौजूदगी पर वोट देने का अधिकार प्रदान कर दिया है। जो चुनाव आयोग और भाजपा को भारी पड़ रहा है।

इस दरम्यान कर्नाटक, महाराष्ट्र, हरियाणा और मध्यप्रदेश में वोट चोरी के आंकड़े प्रमाणों सहित राहुल गांधी ने प्रेस कांफ्रेंस में रखे थे। किंतु जनता की जागरूकता से प्रायः हर क्षेत्र से वोट चोरी के बड़े पैमाने पर आंकड़े आ रहे हैं। महत्वपूर्ण बात ये है कि सरकार के एक मंत्री अनुराग ठाकुर वायनाड से जीती सांसद प्रियंका गांधी की जीत में एक लाख वोटर चोरी का इल्ज़ाम लगाकर स्वतः चुनाव आयोग की पोल खोल रहे हैं, सरकार चुप है। जबकि चौकीदार के वाराणसी लोकसभा चुनाव में हुई धांधली भी अब सामने आ गई है।

कुल मिला कर, यह हकीकत है कि वर्तमान सरकार ने आर्थिक चोरी कर देश के महत्वपूर्ण संस्थानों को बेचा, कोरोना पीएम फंड चोरी किया, इलेक्टोरल फंड के ज़रिए खुद ब खुद चोरी की और दानदाताओं से चोरी कराई ,राजनैतिक चोरी का तो इतिहास बना लिया , कांग्रेस पार्टी के लोगों को ईडी,सीबीआई का भय दिखाकर  उनकी चोरी की, यहां तक की पूरी कांग्रेस सरकार ही मध्यप्रदेश की चोरी कर ली, जो भी चुनाव जीते उनमें वोटों पर डाका डाल के। 

रक्षा, स्वास्थ्य ,शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में निजीकरण के ज़रिए भारी भरकम चोरी की गई। विदेश में भारतीय प्रतिष्ठा को चुराया। चौकीदार ने जी भरकर चोरी की है जिसकी जानकारी सबको है किंतु जनता के मत की चोरी संगीन अपराध है।  ये सीधे-सीधे लोकतंत्र के खात्मा का प्रयास है।समय रहते इसका पकड़ा जाना और मतदाताओं का आक्रोश जायज़ है।कायदे से सरकार को स्वेच्छा से हट जाना चाहिए लेकिन चोर ऐसा हरगिज नहीं करते। उसका इलाज अंततः मतदाताओं को ही करना होगा। बेशक राहुल गांधी ने आज से सात वर्ष पूर्व जो कहा था‌ वह सच था।देर सबेर झूठ पकड़ा गया। यह बड़ी सफलता है। लोकतंत्र को बचाने निरंतर जागरूक रहें। अब तोचीख चीखकर कहें चौकीदार प्योर नहीं है।चोर है,चोर है।

(सुसंस्कृति परिहार लेखिका और एक्टिविस्ट हैं।)

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